Zindgi ki achhi batain किन गुणों को स्वीकार करना चाहिए
1. Achhi baat परोपकार
एक मनुष्य को परोपकारी होना चाहिए। यदि आप से कभी कोई help मांगने आता है और आप वह सहायता प्रदान करने में सक्षम हैं तो आपको सहायता अवश्य करनी चाहिए। किसी भी मनुष्य की सहायता करने से, चाहे वह धन के रूप में हो, चाहे परिश्रम के रूप में अथवा साथ खड़े होने के रूप में, समाज में उसके एक अच्छे व्यक्तित्व का निर्माण होता है। इसके अतिरिक्त लोग आपकी respect भी करते हैं।
2. Achhi baat आदर करना:
कोई भी मनुष्य, चाहे वह आपका भाई हो, मित्र हो, बहन हो, माता-पिता हों, शिक्षक हो, अथवा वह आप से अधिक प्रतिभाशाली हो या कम प्रतिभाशाली हो, चाहे वह आपसे गरीब हो या अमीर, सदैव अपने से सामने वाले का आदर करें। कभी भी किसी को निचा न दिखाएं। दूसरों के प्रति सम्मान तथा प्रेम की भावना रखना उचित होता है। इससे दूसरे व्यक्ति भी आपका सम्मान एवं आपसे प्रेम करते हैं।
3. Achhi baatअपनी गलती स्वीकार करना:
कोई भी person perfect नहीं होता है। हर मनुष्य कभी न कभी कोई गलती कर बैठता है। यदि आप से भी गलती हुई है तो उसे छुपाने की बजाये उसे स्वीकार कर लें तथा उसे सुधारने की कोशिश करें। इससे आप पर लोगों का trust बना रहता है तथा एक अच्छी आकृति बनती है।
4. Achhi baat अपना कार्य लगन से करना:
मनुष्य अपना कोई भी कार्य लगन से करे तो वह कार्य सदैव सफल होता है एवं अच्छे परिणाम देता है। इसलिए अपना कार्य करने में कभी दिल नहीं चुराना चाहिए एवं पूरी dedication के साथ अपने कार्य को संपन्न करना चाहिए।
किन दोषों को अस्वीकार करना चाहिए
मनुष्य में कुछ गुण ऐसे होते हैं जिनके कारण उसके समबन्धियों एवं आस पास के लोगों को तकलीफ होती है और वे गुण दोष में परिवर्तित हो जाते हैं। ऐसे ही कुछ गुण तथा दोष हैं:
अधिक बोलना: एक मनुष्य को दूसरे मनुष्य से बात करनी चाहिए तथा उसका हाल चाल पूछना चाहिए। परन्तु लगातार बोलना तथा बोलते वक़्त अपनी सीमा लांघना किसी भी मनुष्य के लिए अच्छा गुण नहीं है। मनुष्य को time और situation देखकर ही बात करनी चाहिए अन्यथा उसके साहबद दूसरे व्यक्तियों को परेशान कर सकते हैं।
कंजूस न बने: वैसे तो मनुष्य को चादर के हिसाब से ही अपने पैर फ़ैलाने चाहिए और बचत करनी चाहिए। परन्तु कुछ ज्यादा ही बचत करना तथा पैसा खर्च करने में कुछ ज्यादा ही कंजूसी दिखाना किसी भी मनुष्य के व्यक्तित्व के लिए ठीक नहीं होता है। कभी भी मनुष्य को कंजूसी करनी पड़ती है परन्तु सदैव के लिए कंजूस बने रहना मनुष्य के हित में नहीं है।
अफवाहें फैलाना: आज के समय में कई online medium से अफवाहें फैलाई जाती हैं। और आप से उन झूठी ख़बरों तथा अफवाहों को आगे फ़ैलाने के लिए कहा जाता है। यदि आपके पास भी ऐसी कुछ खबरें आएं तो पहले आप अपने स्टार पर उनकी पुष्टि करें तभी उनको आगे भेजें। इन अफवाहों से लोगों को भड़काया जाता है। इस दोष के कारण आपको निजी स्तर पर कोई हानि नहीं होती परन्तु समाज को अनेक प्रकार की हानि हो सकती है।
अच्छी आदतें बनाती हैं विजेता का चरित्र मजबूत
विश्वविख्यात मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा के अनुसार, अक्सर लोगों का 90 फीसदी व्यवहार आदतन होता है. लेकिन, हम अक्सर ऐसा नहीं सोचते हैं. दरअसल, अगर हम अपने जीवन में अनुशासन के साथ अच्छी आदतें अपनाते हैं तो हमारा चरित्र भी अच्छा और मजबूत बन जाता है और हमारी बुरी आदतें हमारे चरित्र को कमज़ोर बना देती हैं. बेशक, अच्छी आदतें मुश्किल से आती हैं लेकिन हमारे जीवन को आसान बना देती हैं और हम जल्दी ही बुरी आदतों के शिकार बन जाते हैं. लेकिन, ये बुरी आदतें हमारे जीवन को मुश्किल बना देती हैं.
पॉज़िटिव एटीट्यूड
अक्सर हम विजेताओं के बारे में यह मान लेते हैं कि, वे (विजेता) अगर मिट्टी को छू लें तो वह मिट्टी सोना बन जाती है. लेकिन, अगर हम उनके जीवन में झांक कर विजेताओं की आदतों को परखें तो हमें एक ख़ास बात यह पता चलती है कि, पॉज़िटिव एटीट्यूड ऐसे लोगों की आदत बन चुका होता है और यह एटीट्यूड उनके प्रत्येक काम और लेन-देन में झलकता है. ऐसे लोग अपना प्रत्येक काम ठीक तरीके से करते हैं और उनकी स्वाभाविक प्रतिक्रियाएं बिलकुल सटीक होती हैं.
नेगेटिव एटीट्यूड
जो लोग अपनी किस्मत पर अपनी हार या असफलता का दोष डालते हैं, वे अक्सर अपने स्वाभाव या चरित्र की एक खास कमी को नज़रंदाज़ कर देते हैं. यह खास कमी है ऐसे लोगों का नेगेटिव एटीट्यूड. अगर हम अक्सर असफल रहने वाले लोगों के जीवन और उनके प्रत्येक काम का विश्लेषण करें तो हम यह पाते हैं कि उन लोगों का नेगेटिव एटीट्यूड ही उनकी आदत बन चुका होता है. ऐसे लोग अक्सर जब भी कोई काम करते हैं, तो पहले तो वे उस काम को करना ही नहीं चाहते या फिर, उस काम में आने वाली विभिन्न प्रॉब्लम्स या चुनौतियों की अनावश्यक चर्चा करने लगते हैं जिससे उनके अधिकतर काम गलत हो जाते हैं.
सही प्रैक्टिस से बन सकते हैं एक्सपर्ट
विजेता के खास गुणों की चर्चा करते हुए सुप्रसिद्ध मोटिवेशनल स्पीकर शिव खेड़ा ने जोर देकर हमें यह भी समझाया है कि, प्रैक्टिस और वह भी सही प्रैक्टिस ही विजेताओं को एक्सपर्ट बनाती है. अगर हम लोग किसी काम को गलत तरीके से करते रहते हैं तो हमें उस काम को गलत तरीके से करने की ही आदत बन जाती है. इसलिए, सफलता हासिल करने के लिए सही प्रैक्टिस और सही ट्रेनिंग लेना हमारे लिए अत्यंत आवश्यक है. शिव खेड़ा ने हमें मार्शल आर्ट का उदाहरण देते हुए यह समझाया है कि, मार्शल आर्ट में वाइट बेल्ट से ब्लैक बेल्ट लेने तक मार्शल आर्टिस्ट को ब्लॉक-पंच की इतनी ज्यादा स्वाभाविक आदत हो जाती है कि किसी से झगड़ा होने पर या अपनी रक्षा के लिए ब्लैक बेल्ट मार्शल आर्टिस्ट को सोचना नहीं पड़ता बल्कि अपनी स्वाभाविक प्रतिक्रिया से वह बिलकुल सही ब्लॉक पंच मारता है.
विजेता सकारात्मक व्यवहार को बना लेते हैं अपनी स्वाभाविक प्रतिक्रिया
शिव खेड़ा ने हमें आर्मी का सटीक उदाहरण देकर भी समझाया है कि, विभिन्न देशों के बीच में युद्ध को कभी-कभार ही होता है लेकिन सभी देशों की आर्मी रोज़ाना युद्ध की प्रैक्टिस करती है ताकि युद्ध होने पर उन्हें कुछ सोचना न पड़े और वे लोग स्वाभाविक तौर पर युद्ध कर सकें. अगर सैनिक रोज़ाना युद्ध करने की प्रैक्टिस न करें तो जब युद्ध होगा तो वे तुरंत मुकाबला नहीं कर सकेंगे और हार जायेंगे, ऐसे में, कई सैनिकों अपनी जान भी गंवानी पड़ेगी इसलिए, हम लोगों को प्रत्येक सकारात्मक व्यवहार को अपनी स्वाभाविक प्रतिक्रिया जरुर बनाना चाहिए.
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